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बुन्देली न्यूज़

HARPALPUR, MADHYA PRADESH, India

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महोबा: बगरोनी के खेत में 'प्रकट' हुई हनुमान प्रतिमा, आस्था या सुनियोजित साजिश?



महोबा/महौबकंठ:

जनपद के थाना महौबकंठ अंतर्गत ग्राम बगरोनी में उस समय हलचल मच गई, जब एक खेत में हनुमान जी की मूर्ति निकलने की सूचना आग की तरह फैल गई। नवरात्रि के पावन पर्व के बीच हुई इस घटना को जहाँ कुछ ग्रामीण 'दैवीय चमत्कार' मान रहे हैं, वहीं सजग नागरिकों और प्रत्यक्षदर्शियों ने इस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

​मिली जानकारी के अनुसार, बगरोनी गाँव के एक खेत में जमीन से हनुमान जी की प्रतिमा प्रकट होने का दावा किया गया। सूचना मिलते ही आस-पास के लोग दर्शन के लिए जुटने लगे। हालांकि, मूर्ति की चमक और बनावट को देखकर कई लोगों का संदेह गहरा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मूर्ति को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि इसे हाल ही में बनाया गया है और किसी ने जानबूझकर इसे जमीन में दबाकर 'प्रकट' होने का स्वांग रचा है।

आस्था के साथ खिलवाड़ पर आक्रोश

​धार्मिक मर्यादाओं को लेकर सजग ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह वास्तव में प्राचीन प्रतिमा है जो धरती से निकली है, तो यह गौरव का विषय है और यहाँ अविलंब मंदिर निर्माण होना चाहिए। लेकिन, यदि नवरात्रि के पवित्र समय में किसी ने स्वार्थ या धार्मिक मजाक के उद्देश्य से नई मूर्ति यहाँ रखी है, तो यह हिंदू धर्म और करोड़ों भक्तों की आस्था का अपमान है।

​"धर्म आस्था का विषय है, व्यापार या मनोरंजन का नहीं। यदि कोई जानबूझकर लोगों की भावनाओं से खेल रहा है, तो उस पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।" — स्थानीय नागरिक


मुख्य चिंताएं और मांगें:

  • प्रशासनिक जांच: क्या यह किसी की निजी जमीन पर कब्जा करने या चढ़ावा इकट्ठा करने की साजिश है?
  • पुरातत्व विभाग की भूमिका: क्या मूर्ति की प्राचीनता की जांच के लिए विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा?
  • दोषियों पर कार्रवाई: यदि यह कृत्य जानबूझकर किया गया है, तो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के जुर्म में उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

LPG का असली 'विकल्प' है DME गैस: संकट का समाधान और भविष्य की ऊर्जा

​भारत में LPG (रसोई गैस) की बढ़ती कीमतों और आयात पर अत्यधिक निर्भरता के बीच DME (डाइमिथाइल ईथर) एक क्रांतिकारी समाधान बनकर उभरा है। यह केवल एक गैस नहीं, बल्कि LPG की कमियों को दूर करने का एक वैज्ञानिक तरीका है।

1. LPG की कमी को DME कैसे पूरा करेगी?

​LPG मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है, जो कच्चे तेल (Crude Oil) के शोधन से मिलती है। चूँकि भारत कच्चा तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए LPG की कमी और महंगाई बनी रहती है। DME इस कमी को निम्न तरीकों से पूरा करेगी:

  • 20% ब्लेंडिंग (मिश्रण): शुरुआती स्तर पर LPG में 20% तक DME मिलाया जा सकता है। इसके लिए मौजूदा चूल्हों या सिलेंडरों में किसी बदलाव की जरूरत नहीं होती। इससे 20% LPG की बचत सीधे तौर पर होगी।
  • स्वदेशी उत्पादन: LPG के विपरीत, DME को भारत में मौजूद खराब श्रेणी के कोयले (Low-grade Coal), कृषि अवशेष (पराली) और बायोमास से बनाया जा सकता है। इससे हमें अरब देशों से गैस मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  • लागत में कमी: घरेलू स्रोतों से उत्पादन होने के कारण, DME की उत्पादन लागत LPG की तुलना में काफी कम बैठती है, जिससे आम आदमी को सस्ता सिलेंडर मिल सकेगा।

2. तकनीकी रूप से LPG के समान (Compatibility)

​LPG और DME के भौतिक गुण लगभग एक जैसे हैं:

  • दबाव (Pressure): जिस दबाव पर LPG तरल बनती है, लगभग उसी दबाव पर DME भी तरल हो जाती है। यानी, जो सिलेंडर आज आपके घर में है, उसी में DME भरी जा सकती है।
  • परिवहन: इसे ले जाने के लिए नए टैंकरों या पाइपलाइनों की जरूरत नहीं है; मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर ही काम आएगा।

3. 'कुकिंग फ्यूल' के रूप में DME के विशेष फायदे

​LPG की तुलना में DME रसोई के लिए क्यों बेहतर है?

  1. अधिक सुरक्षित: DME की 'ज्वलनशीलता सीमा' (Flammability limit) LPG से अलग है, जिससे रिसाव होने पर आग लगने का खतरा थोड़ा कम होता है।
  2. पर्यावरण के अनुकूल: जलते समय यह शून्य धुआं पैदा करती है। यदि इसे बायोमास से बनाया जाए (Bio-DME), तो यह पूरी तरह से 'कार्बन न्यूट्रल' ईंधन बन जाता है।
  3. ऊर्जा घनत्व: हालांकि इसका ऊर्जा घनत्व LPG से थोड़ा कम है, लेकिन इसकी दहन क्षमता (Burning Efficiency) इतनी अधिक है कि यह खाना पकाने में लगभग बराबर का परिणाम देती है।

4. भारत सरकार का 'DME मिशन'

​भारत सरकार (NITI Aayog के माध्यम से) एक ऐसी योजना पर काम कर रही है जिसके तहत:

  • ​बड़े पैमाने पर Coal-to-DME प्लांट लगाए जा रहे हैं।
  • ​गाँवों में जहाँ LPG की पहुँच कम है, वहाँ सीधे 'DME ग्रिड' बनाने पर विचार हो रहा है।
  • आत्मनिर्भर भारत: इससे हम ऊर्जा के क्षेत्र में विदेशों के बजाय खुद पर निर्भर होंगे।



फल ही नहीं, 'महा-औषधि' भी है अमरूद; सेहत के राज और तंत्र-मंत्र में इसका रहस्यमय उपयोग



प्रकृति ने हमें कई ऐसे अनमोल उपहार दिए हैं, जो हमारे घर के आंगन में तो होते हैं, लेकिन हम उनकी असली ताकत से अनजान रहते हैं। ऐसा ही एक फल है अमरूद (Psidium guajava)। सर्दियों की गुनगुनी धूप में काले नमक के साथ अमरूद का स्वाद किसे नहीं भाता? लेकिन आज की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको अमरूद के उन पहलुओं से रूबरू कराएंगे, जो शायद आपने पहले कभी नहीं सुने होंगे।


1. सेहत का 'पावरहाउस': क्यों है यह सेब से भी बेहतर?

आयुर्वेद में अमरूद को 'अमृत फल' की संज्ञा दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें सेब की तुलना में कहीं अधिक पोषक तत्व होते हैं।

  • विटामिन-सी का भंडार: एक अमरूद में संतरे से 4 गुना ज्यादा विटामिन-सी होता है, जो आपकी त्वचा में निखार लाता है और बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है।

  • पेट के रोगों का काल: अमरूद के बीज और फाइबर 'नेचुरल लैक्सेटिव' का काम करते हैं। पुरानी से पुरानी कब्ज (Constipation) के लिए खाली पेट अमरूद खाना रामबाण इलाज है।

  • वजन घटाने में सहायक: इसमें कैलोरी कम और फाइबर ज्यादा होता है, जिससे पेट जल्दी भर जाता है और आप अतिरिक्त खाने से बचते हैं।

  • कोलेस्ट्रॉल पर वार: यह शरीर में 'गुड कोलेस्ट्रॉल' को बढ़ाता है और नसों को साफ रखने में मदद करता है।


2. पत्तों में छिपा है 'चमत्कारी इलाज'

केवल फल ही नहीं, अमरूद के पत्ते भी किसी औषधि से कम नहीं हैं:

  • दांत का दर्द: पत्तों को उबालकर कुल्ला करने से दांत के दर्द और मसूड़ों की सूजन में तुरंत आराम मिलता है।

  • डायबिटीज: अमरूद के पत्तों की चाय ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

  • बालों का झड़ना: पत्तों के रस को स्कैल्प पर लगाने से बाल मजबूत होते हैं।


3. तंत्र शास्त्र और लोक मान्यताओं में अमरूद का रहस्य

भारतीय ग्रामीण अंचलों और प्राचीन तंत्र विद्याओं में अमरूद के पेड़ और फल का एक अलग ही महत्व बताया गया है। हालांकि विज्ञान इन्हें 'विश्वास' की श्रेणी में रखता है, लेकिन जनश्रुतियों में इनका गहरा असर माना जाता है:

  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश: तंत्र शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर 'ऊपरी हवा' या नकारात्मक ऊर्जा का साया हो, तो शनिवार के दिन एक पका हुआ अमरूद सिर से सात बार वारकर किसी चौराहे पर रख देने से बाधाएं दूर होती हैं।

  • सुख-समृद्धि की जड़: ऐसी मान्यता है कि अमरूद की जड़ को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन की आवक बढ़ती है और दरिद्रता का नाश होता है।

  • नजर दोष: छोटे बच्चों को नजर लगने पर अमरूद के पत्तों को सात बार घुमाकर आग में जलाने की परंपरा कई राज्यों में आज भी प्रचलित है।

  • वास्तु शास्त्र: वास्तु के अनुसार, घर की उत्तर-दिशा में अमरूद का पेड़ लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और शांति को बढ़ावा देता है।


4. सावधानी: कब हो सकता है नुकसान?

अमरूद के फायदों के बीच कुछ चेतावनियां भी जरूरी हैं:

  • रात में सेवन: इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए सूर्यास्त के बाद इसे खाने से खांसी या कफ की समस्या हो सकती है।

  • पथरी के रोगी: अमरूद के बीजों में मौजूद कैल्शियम और ऑक्सलेट 'किडनी स्टोन' की समस्या को बढ़ा सकते हैं। ऐसे रोगियों को बीज निकालकर ही सेवन करना चाहिए।

  • गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को अधिक मात्रा में अमरूद खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेट में मरोड़ या दस्त की शिकायत हो सकती है।

कौन था हरीश राणा? (निजी और शैक्षिक पृष्ठभूमि)



हरीश राणा दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता था। हादसे से पहले वह एक ऊर्जावान और सपनों से भरा युवक था:

  • शिक्षा और करियर: हरीश ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद बी.कॉम (B.Com) किया था। वह अपने करियर को लेकर काफी गंभीर था और भविष्य में एक अच्छी नौकरी कर अपने बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनना चाहता था।

  • कामकाज: हादसे के समय वह काम की तलाश में था और कुछ छोटे-मोटे प्रोजेक्ट्स से जुड़ा हुआ था। वह अपने परिवार का इकलौता बेटा है, जिससे उसके माता-पिता को बहुत उम्मीदें थीं।

  • स्वभाव: पारिवारिक सूत्रों और पड़ोसियों के अनुसार, हरीश एक मिलनसार और शांत स्वभाव का लड़का था। उसे पढ़ने-लिखने और अपने दोस्तों के साथ समय बिताने का शौक था।


वह काला दिन: 2013 की दुर्घटना

हरीश की जिंदगी 2013 में एक पल में बदल गई। वह अपने घर की चौथी मंजिल की छत पर था, जहाँ से पैर फिसलने के कारण वह सीधे नीचे गिर गया।

  • इस गिरने से उसके सिर (Brain Injury) और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं।

  • डॉक्टरों ने कई ऑपरेशन किए, लेकिन दिमाग की नसों में आई गहरी चोट के कारण वह 'पर्सीस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट' (PVS) में चला गया।

  • PVS का मतलब है कि इंसान की आंखें तो खुलती हैं, वह सोता और जागता भी है, लेकिन उसे अपने आसपास के माहौल का कोई अहसास नहीं होता। वह न कुछ समझ सकता है और न ही प्रतिक्रिया दे सकता है।

खबर के लिए विशेष अंश (Addition for News):

"बी.कॉम की डिग्री हाथ में लेकर सुनहरे भविष्य के सपने बुनने वाला हरीश, आज 11 सालों से एक कमरे की चारदीवारी में कैद है। जिस उम्र में उसे अपने पिता की लाठी बनना था, उस उम्र में 80 साल के बुजुर्ग पिता और 72 साल की बीमार मां को उसे गोद में उठाकर नहलाना-धुलाना पड़ता है। शिक्षा और योग्यता धरी की धरी रह गई, और पीछे छूट गई तो बस एक अंतहीन प्रतीक्षा—या तो ठीक होने की, या फिर सम्मानजनक विदाई की।"


नई दिल्ली: न्याय और जीवन के अधिकार के बीच फंसी एक ऐसी कहानी, जिसने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। यह कहानी है 36 वर्षीय हरीश राणा की, जो पिछले 11 वर्षों से एक 'जिंदा लाश' की तरह बिस्तर पर पड़े हैं, और उनके बुजुर्ग माता-पिता की, जो अब अपने बेटे के लिए 'इच्छा मृत्यु' (Euthanasia) की मांग कर रहे हैं।

एक दुर्घटना और थम गई जिंदगी

हरीश राणा की जिंदगी साल 2013 में पूरी तरह बदल गई। एक दुखद हादसे में हरीश चौथी मंजिल की छत से नीचे गिर गए थे। इस दुर्घटना में उनके सिर और रीढ़ की हड्डी में इतनी गंभीर चोटें आईं कि वे 'पर्सीस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट' (Pervasive Vegetative State) में चले गए। तब से लेकर आज तक, हरीश न बोल सकते हैं, न चल सकते हैं और न ही अपनी कोई जरूरत बता सकते हैं। वे पूरी तरह से एक फीडिंग ट्यूब (भोजन नली) और अपने माता-पिता की सेवा पर निर्भर हैं।

बुजुर्ग माता-पिता की बेबसी

हरीश के पिता (80 वर्ष) और माता (72 वर्ष) ने पिछले एक दशक से अपने बेटे की दिन-रात सेवा की है। लेकिन अब उम्र के इस पड़ाव पर उनकी हिम्मत जवाब दे रही है। कोर्ट में दी गई अपनी याचिका में उन्होंने कहा:

  • आर्थिक तंगी: बेटे के इलाज और देखभाल में जमापूंजी खत्म हो चुकी है।

  • शारीरिक असमर्थता: बढ़ती उम्र के कारण अब वे अपने बेटे को बिस्तर से हिलाने या नहलाने-धुलाने में भी असमर्थ हैं।

  • भविष्य की चिंता: माता-पिता का सबसे बड़ा डर यह है कि "हमारे बाद हमारे बेटे का क्या होगा? उसे कौन संभालेगा?"

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला और कानूनी पेच

हाल ही में यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंचा, जहाँ परिवार ने हरीश के लिए 'पैसिव यूथेनेशिया' की अनुमति मांगी। हालांकि, अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के फैसले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:

  1. लाइफ सपोर्ट का अभाव: मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, हरीश वेंटिलेटर या किसी कृत्रिम मशीन के सहारे नहीं जी रहे हैं। वे प्राकृतिक रूप से सांस ले रहे हैं।

  2. कानूनी सीमा: भारत के कानून के अनुसार, 'पैसिव यूथेनेशिया' की अनुमति केवल तब दी जा सकती है जब मरीज को जीवित रखने के लिए मशीन (Life Support) की जरूरत हो। हरीश के मामले में फीडिंग ट्यूब हटाना 'इच्छा मृत्यु' नहीं बल्कि 'भूखा मारकर हत्या' की श्रेणी में माना जाएगा।

  3. संविधान का अनुच्छेद 21: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'जीने के अधिकार' में 'मरने का अधिकार' शामिल नहीं है, जब तक कि स्थिति पूरी तरह लाइलाज और मशीन पर टिकी न हो।

क्या है आगे का रास्ता?

कोर्ट ने परिवार की स्थिति पर सहानुभूति जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे देखें कि क्या हरीश को किसी सरकारी होम-केयर या मेडिकल सहायता सुविधा में स्थानांतरित किया जा सकता है।


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  • संस्कारों से सजेगा परिवार, तभी बनेगा सशक्त राष्ट्र: हरपालपुर में ब्रह्माकुमारीज ने मनाया 'महिला दिवस' और 'रंग पंचमी' का संगम

    हरपालपुर (छतरपुर): "नारी केवल परिवार की धुरी ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है। जब एक महिला आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाती है, तो वह न केवल स्वयं सशक्त होती है, बल्कि पूरे परिवार को संस्कारवान बनाती है।" यह प्रेरक विचार ब्रह्माकुमारी नंदा बहन जी ने हरपालपुर के 'दिव्य धाम' प्रांगण में आयोजित विशेष कार्यक्रम में व्यक्त किए।

    ​अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा 'महिलाएं: नए भारत की ध्वजवाहक' विषय पर एक भव्य आध्यात्मिक संगोष्ठी और स्नेह मिलन समारोह का आयोजन किया गया।

    प्रतिष्ठित महिलाओं की रही गरिमामयी उपस्थिति

    ​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अनुगया सिंह (चिकित्सा अधिकारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरपालपुर) उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों में ममता बैसाखिया (पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष), पूनम गंगेले (म्यूजिक टीचर, सांदीपनि विद्यालय नौगांव), डॉ. मनीष त्रिपाठी (शिक्षक) और मुक्ता सक्सेना (योगा टीचर) शामिल हुईं। कार्यक्रम का संचालन और संयोजन बी.के. नंदा बहन एवं मंजू बहन के सानिध्य में संपन्न हुआ।

    आध्यात्मिकता से सशक्तिकरण का संदेश

    ​मुख्य वक्ता बी.के. नंदा बहन ने महिलाओं को भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि आज की नारी को शिक्षा के साथ-साथ अपनी मर्यादाओं और आचरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वहीं, बी.के. पूनम ने संबोधित करते हुए कहा कि आध्यात्मिक दृष्टि से नारी शांति, शक्ति और पवित्रता का प्रतीक है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके आत्म-स्वरूप की पहचान कराना और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करना रहा।

    रंग पंचमी पर बिखरे 'चैतन्य' रंग

    ​चूँकि अवसर रंग पंचमी का भी था, इसलिए आध्यात्मिक चर्चा के साथ-साथ उत्सव का उल्लास भी देखने को मिला।

    • दिव्य झांकी: कार्यक्रम में राधा-कृष्ण की मनमोहक 'चैतन्य झांकी' सजाई गई, जिसने सभी का मन मोह लिया।
    • स्नेह की होली: उपस्थित महिलाओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और ईश्वरीय प्रेम के रंग में सराबोर हुईं।

    संकल्प और आभार

    ​कार्यक्रम के अंत में उपस्थित नगर की प्रतिष्ठित महिलाओं ने समाज में नारी सम्मान और संस्कारों को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया। ब्रह्माकुमारी विद्यालय की ओर से सभी अतिथियों का अभिनंदन एवं आभार व्यक्त किया गया। समापन सामूहिक आरती और ईश्वरीय प्रसाद वितरण के साथ हुआ।


    ​🌸 ब्रह्माकुमारीज हरपालपुर: 'नए भारत की ध्वजवाहक' बनीं महिलाएं! अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और रंग पंचमी के अवसर पर आध्यात्मिक कार्यक्रम संपन्न। डॉ. अनुगया सिंह और बी.के. नंदा बहन ने दिया संस्कारों और मर्यादाओं से परिवार को सजाने का संदेश। राधा-कृष्ण की चैतन्य झांकी रही आकर्षण का केंद्र। #BrahmaKumaris #Harpalpur #WomensDay #SpiritualAwakening



    मालती के लिए 'देवदूत' बने रक्तवीर अमित: विशाखापट्टनम से कार्गो विमान में आया दुनिया का सबसे दुर्लभ 'बॉम्बे पॉजिटिव' ब्लड

    मध्य प्रदेश छतरपुर
    मालती के लिए 'देवदूत' बने रक्तवीर अमित: विशाखापट्टनम से कार्गो विमान में आया दुनिया का सबसे दुर्लभ 'बॉम्बे पॉजिटिव' ब्लड
    छतरपुर/ग्वालियर। कहते हैं कि जब इरादे नेक हों, तो कुदरत भी रास्ता बना देती है। छतरपुर के दौरिया गांव की मालती पाल के लिए बीते कुछ दिन किसी भयावह सपने से कम नहीं थे, लेकिन 'रक्तवीर सेवादल' के जज्बे और आधुनिक तकनीक के तालमेल ने उन्हें मौत के मुंह से खींच लिया। जिला अस्पताल की एक अक्षम्य लापरवाही ने एक प्रसूता को जिंदगी और मौत के बीच लाकर खड़ा कर दिया था, जिसे बचाने के लिए विशाखापट्टनम से ग्वालियर तक 'मिशन लाइफ' चलाया गया।



    अस्पताल की लापरवाही: गलत ब्लड ग्रुप ने बिगाड़ा खेल

    मामला तब शुरू हुआ जब मालती पाल ने जिला अस्पताल में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। खुशियों का माहौल तब गम में बदल गया जब मालती की ब्लीडिंग रुकना बंद हो गई। 1 मार्च को उनके पति दीपक ने खुद रक्तदान किया। अस्पताल के ब्लड बैंक ने जांच के बाद ग्रुप 'ओ पॉजिटिव' बताकर वही खून मालती को चढ़ा दिया। यहीं से बर्बादी शुरू हुई; गलत खून चढ़ते ही रिएक्शन हुआ और मालती का पूरा शरीर इंफेक्शन की चपेट में आ गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल ग्वालियर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।



    खुलासा: ओ पॉजिटिव नहीं, 'बॉम्बे पॉजिटिव' है मालती का खून

    ग्वालियर में जब गहन जांच हुई, तो डॉक्टरों के साथ-साथ परिजनों के भी होश उड़ गए। मालती का ब्लड ग्रुप 'ओ पॉजिटिव' नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे दुर्लभ 'बॉम्बे पॉजिटिव' (hh blood group) था। गलत खून चढ़ने की वजह से उनका ब्लड पूरी तरह इंफेक्टेड हो चुका था और किडनी पर असर पड़ने के कारण उन्हें डायलिसिस की जरूरत आन पड़ी। मालती को बचाने के लिए अब केवल 2 यूनिट 'बॉम्बे पॉजिटिव' खून ही एकमात्र उम्मीद थी।



    अमित जैन का मिशन: विशाखापट्टनम से ग्वालियर तक की दौड़

    जब उम्मीदें दम तोड़ रही थीं, तब छतरपुर के 'रक्तवीर सेवादल' के अमित जैन ने मोर्चा संभाला। देशभर के ब्लड बैंकों और डोनर्स नेटवर्क को खंगालने के बाद पता चला कि यह दुर्लभ खून आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में उपलब्ध है। समय रेत की तरह फिसल रहा था, इसलिए सड़क या ट्रेन का रास्ता चुनना जोखिम भरा था। गुरुवार सुबह कार्गो विमान सेवा के जरिए रक्त की यूनिट्स को विशाखापट्टनम से उड़ाया गया और वे सीधे ग्वालियर मेडिकल कॉलेज पहुँचीं। फिलहाल मालती का इलाज जारी है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर पल-पल नजर बनाए हुए है।



    क्या है बॉम्बे पॉजिटिव ब्लड?

    यह दुनिया का सबसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप है, जो प्रति 10 लाख लोगों में से मुश्किल से 4 या 5 लोगों में पाया जाता है। इसकी खोज 1952 में मुंबई (तब बॉम्बे) में हुई थी। इस ग्रुप वाले व्यक्ति को केवल बॉम्बे पॉजिटिव ग्रुप का ही खून चढ़ाया जा सकता है, अन्यथा शरीर इसे स्वीकार नहीं करता और जानलेवा रिएक्शन हो जाता है।

    महाराजपुर विधायक कामाख्या प्रताप सिंह को मिला 'विधानसभा स्तरीय शांति पुरस्कार'

    छतरपुर/महाराजपुर: क्षेत्र के विकास और जनसेवा में निरंतर सक्रिय महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक कामाख्या प्रताप सिंह (टीका राजा) के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। उन्हें उनके क्षेत्र में शांति, सद्भाव और जन-कल्याणकारी कार्यों के लिए 'विधानसभा स्तरीय शांति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है।

    क्षेत्र में हर्ष की लहर

    ​विधायक कामाख्या प्रताप सिंह को यह सम्मान मिलने की खबर फैलते ही महाराजपुर विधानसभा सहित पूरे जिले में खुशी का माहौल है। समर्थकों और क्षेत्रीय जनता ने उन्हें बधाई देते हुए इसे क्षेत्र के लिए गौरव की बात बताया है।

    शांति और विकास की राजनीति

    ​विधायक निर्वाचित होने के बाद से ही कामाख्या प्रताप सिंह ने क्षेत्र में गुंडागर्दी और अशांति के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने न केवल कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में प्रशासन का सहयोग किया, बल्कि आपसी विवादों को सुलझाने और सामुदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    मुख्य बिंदु:

    • सद्भाव को बढ़ावा: विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न समुदायों के बीच आपसी भाईचारे को मजबूत करना।
    • युवाओं को प्रेरणा: राजनीति में शालीनता और सेवा भाव की नई मिसाल पेश करना।
    • विकास के साथ शांति: क्षेत्र के बुनियादी विकास के साथ-साथ जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देना।

    विधायक ने जनता को समर्पित किया सम्मान

    ​पुरस्कार प्राप्त करने के बाद विधायक कामाख्या प्रताप सिंह ने कहा कि यह सम्मान उनका नहीं, बल्कि महाराजपुर की देवतुल्य जनता का है। उन्होंने कहा, "यह पुरस्कार मुझे क्षेत्र की शांति और प्रगति के लिए और अधिक ऊर्जा के साथ काम करने की प्रेरणा देगा।"

    होनहार धैर्य राजपूत ने रचा इतिहास: मात्र ढाई महीने की कोचिंग और कड़ी मेहनत से सैनिक स्कूल परीक्षा में लहराया परचम

    ​होनहार धैर्य राजपूत ने रचा इतिहास: मात्र ढाई महीने की कोचिंग और कड़ी मेहनत से सैनिक स्कूल परीक्षा में लहराया परचम
    ​हरपालपुर। प्रतिभा और सही मार्गदर्शन जब मिल जाते हैं, तो सफलता निश्चित हो जाती है। इसे सच कर दिखाया है नगर के होनहार छात्र धैर्य राजपूत ने। तक्षशिला पब्लिक मॉडल स्कूल के छात्र धैर्य ने अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा में 300 में से 257 अंक हासिल कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है।
    ​ढाई महीने की तैयारी और कोचिंग का कमाल
    ​धैर्य की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने मात्र ढाई महीने की संक्षिप्त अवधि में सघन तैयारी की। उनकी इस उपलब्धि में उनकी कोचिंग टीचर स्नेहा मैडम का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा। स्नेहा मैडम के कुशल मार्गदर्शन, विशेष शिक्षण तकनीक और धैर्य की दिन-रात की मेहनत ने इस कठिन परीक्षा में शानदार सफलता दिलाई है।
    ​धैर्य, हरपालपुर निवासी श्रीमती अंजू राजपूत एवं डॉ. धर्मेंद्र सिंह राजपूत (पशु चिकित्सा अधिकारी, चौका गाँव, उत्तर प्रदेश) के सुपुत्र हैं।
    ​क्षेत्र में खुशी की लहर
    ​धैर्य के चयन से न केवल उनके परिवार में हर्ष का माहौल है, बल्कि तक्षशिला पब्लिक मॉडल स्कूल और पूरे नगर का नाम रोशन हुआ है। विद्यालय प्रबंधन ने इसे अन्य छात्र-छात्राओं के लिए एक मिसाल बताया है।
    ​"धैर्य की लगन और स्नेहा मैडम के सही मार्गदर्शन ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची, तो कम समय में भी बड़ी सफलता प्राप्त की जा सकती है। उनके चयन ने हम सभी को गौरवान्वित किया है।"
    — विद्यालय प्रशासन, तक्षशिला पब्लिक मॉडल स्कूल
    ​गुरुजनों और माता-पिता का मान बढ़ाया
    ​नगरवासियों और विद्यालय परिवार ने धैर्य के उज्जवल भविष्य की कामना की है। उनकी इस उपलब्धि पर गुरुजनों ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि धैर्य ने न केवल अपने माता-पिता का सपना पूरा किया है, बल्कि क्षेत्र के अन्य बच्चों को भी कड़ी मेहनत और सही ट्यूशन-कोचिंग के महत्व से अवगत कराया है।
    स्वदेशी का परचम: हरपालपुर के डॉ. आनंद और डॉ. निकिता के 'वुमेन हेल्थ स्टार्टअप' ने राष्ट्रीय स्तर पर बटोरी सुर्खियाँ
    हरपालपुर/छतरपुर: बुंदेलखंड की धरती अब न केवल संस्कारों के लिए, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य नवाचारों (Health Innovations) के लिए भी पहचानी जा रही है। क्षेत्र के सरसेड़ ग्राम स्थित महादेव भगवान और अर्धकुमारी माता के आशीर्वाद से, नगर की प्रतिष्ठित एवं सबकी प्रिय श्रीमती आशा चौबे (आशा बहन जी) के पुत्र डॉ. आनंद और पुत्रवधू डॉ. निकिता के स्टार्टअप को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है।
    प्रमुख हस्तियों ने सराहा 'अमृति' का नवाचार
    हाल ही में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में, इनके द्वारा विकसित 'Home-based Hormone Balancer DIY Solution' और भारत के पहले 'विमेन च्यवनप्राश' (#Nurtureprash) को विशेषज्ञों ने खूब सराहा। इस अवसर पर देश की जानी-मानी हस्तियों ने उनके स्टार्टअप amriti.store के प्रयासों की प्रशंसा की:
    आचार्य बालकृष्ण जी (पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार): उन्होंने आयुर्वेद को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने के इस प्रयास को सराहा।
    त्रिपुरा की प्रथम महिला (माननीय राज्यपाल महोदय की धर्मपत्नी): उन्होंने महिला स्वास्थ्य पर केंद्रित इस पहल की सराहना की।
    डॉ. विश्वरूप राय चौधरी: प्रसिद्ध स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने भी इस स्टार्टअप के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सराहा।
    आयुष मंत्रालय के सदस्य: मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने भी स्टार्टअप के 'DIY समाधानों' को भविष्य की जरूरत बताया।
    क्या है खास?
    डॉ. आनंद और डॉ. निकिता का यह हेल्थ स्टार्टअप मुख्य रूप से महिलाओं के हार्मोनल असंतुलन को प्राकृतिक तरीके से ठीक करने पर केंद्रित है। इनका #Nurtureprash देश का पहला ऐसा च्यवनप्राश है, जिसे खास तौर पर महिलाओं की शारीरिक संरचना और उनकी पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
    "यह केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि आयुर्वेद की शक्ति को हर घर तक पहुँचाने का एक संकल्प है। सरसेड़ महादेव की कृपा और परिवार के आशीर्वाद ने हमें इस मुकाम तक पहुँचाया है।" — डॉ. आनंद एवं डॉ. निकिता
    क्षेत्र में हर्ष की लहर
    हरपालपुर जैसे छोटे शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले इस युवा दंपत्ति की सफलता पर पूरे नगर और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। परिजनों और शुभचिंतकों ने इसे बुंदेलखंड के लिए एक गौरवमयी उपलब्धि बताया है।

    बड़ी पहल: बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए जिला अस्पताल में आज से 'HPV वैक्सीनेशन' का आगाज


    महिला स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, आज जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा एचपीवी (HPV) वैक्सीन अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया जा रहा है। यह वैक्सीन महिलाओं में होने वाले घातक सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) से बचाव में रामबाण सिद्ध होती है।

    आज के कार्यक्रम का विवरण:

    • स्थान: जिला चिकित्सालय, कमरा नंबर- 8
    • समय: दोपहर 12:00 बजे से
    • लक्षित आयु वर्ग: 14 से 15 वर्ष की बालिकाएं

    अभिभावकों के लिए जरूरी संदेश

    ​डॉक्टरों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा के लिए सही समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है। जिला अस्पताल के विशेषज्ञों ने अपील की है कि जिन अभिभावकों की बेटियों की आयु 14 से 15 वर्ष के बीच है, वे आज अस्पताल पहुंचकर इस सुविधा का लाभ उठाएं।

    "एक सजग कदम, आपकी बेटी का सुरक्षित भविष्य"

    यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है।


    टीकाकरण के लिए क्या करें?

    ​अभिभावक अपनी बेटियों को लेकर दोपहर 12 बजे जिला चिकित्सालय के कमरा नंबर 8 में पहुँचें। साथ में पहचान के लिए कोई भी सरकारी दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड) अवश्य रखें।

    हरपालपुर: आगामी त्योहारों को लेकर शांति समिति की बैठक संपन्न, सौहार्द बनाए रखने की अपील

    हरपालपुर। आगामी त्योहारों के मद्देनजर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से थाना परिसर में शांति समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। थाना प्रभारी संजय राय जी की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में नगर के गणमान्य नागरिकों, प्रबुद्ध जनों और पत्रकारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    बैठक के मुख्य बिंदु:

    • आपसी भाईचारा: थाना प्रभारी ने अपील की कि सभी त्योहार आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ मनाएं। किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और न ही उसे सोशल मीडिया पर फैलाएं।
    • सुरक्षा व्यवस्था: त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ाई जाएगी। असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
    • जनता का सहयोग: थाना प्रभारी संजय राय जी ने कहा कि पुलिस प्रशासन जनता की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन व्यवस्था बनाए रखने में नगरवासियों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
    • पत्रकारों की भूमिका: बैठक में मौजूद पत्रकारों से भी अनुरोध किया गया कि वे सकारात्मक पत्रकारिता के माध्यम से समाज में शांति का संदेश पहुंचाएं।

    गणमान्य जनों ने रखे सुझाव

    ​बैठक के दौरान नगर के सम्मानित नागरिकों ने त्योहारों के समय ट्रैफिक व्यवस्था और साफ-सफाई से संबंधित अपने सुझाव भी रखे। थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया कि प्रशासन द्वारा सभी उचित प्रबंध समय रहते पूरे कर लिए जाएंगे।

    "त्योहार हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं, इन्हें बिना किसी डर और पूरे उत्साह के साथ मनाएं। पुलिस आपकी सुरक्षा में मुस्तैद है।" — संजय राय जी (थाना प्रभारी, हरपालपुर)


    ​🚩 ग्राम बिलहरी में गूंजेगा माता का जयकारा: श्री दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा एवं शतचंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन

    नौगांव, छतरपुर:

    बुंदेलखंड की पावन धरा पर स्थित ग्राम बिलहरी (नौगांव) में भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम होने जा रहा है। श्री राजदुलारी माता मंदिर में आगामी 25 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक श्री श्री 1008 श्री दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा एवं शतचंडी महायज्ञ का दिव्य आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर समस्त ग्रामवासियों में भारी उत्साह और हर्ष का माहौल है।

    ​📅 पंचदिवसीय महोत्सव का कार्यक्रम विवरण:

    ​यज्ञ समिति द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, उत्सव की शुरुआत जलयात्रा के साथ होगी:

    • 25 फरवरी (बुधवार): जलयात्रा, दशविधि स्नान एवं प्रायश्चित पूजन के साथ अनुष्ठान का मंगलारंभ।
    • 26 फरवरी (गुरुवार): मंडप प्रवेश, वेदी पूजन, अग्नि स्थापना, नवग्रह एवं वास्तु पूजन।
    • 27 फरवरी (शुक्रवार): अन्नाधिवास, फलाधिवास, घृताधिवास एवं पुष्पाधिवास जैसी अधिवास प्रक्रियाएं।
    • 28 फरवरी (शनिवार): माता रानी की भव्य शोभायात्रा, जिसमें ग्राम के श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों के साथ शामिल होंगे।
    • 1 मार्च (रविवार): माँ दुर्गा की प्राण प्रतिष्ठा, महायज्ञ की पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारा
    • "यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समस्त क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति के लिए किया जा रहा एक सामूहिक संकल्प है।"

      निवेदक: समस्त ग्रामवासी, बिलहरी


      ​✨ श्रद्धालुओं से विशेष अपील

      ​ग्रामवासियों ने धर्मप्रेमी जनता से अपील की है कि इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन में सपरिवार पधारकर धर्म लाभ उठाएं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करें।

      ​🚩 जय माता दी! 🚩

    हरपालपुर: गुटखा बाजार में 'कृत्रिम किल्लत' का खेल, जमाखोरी से आसमान पर पहुंचे दाम
    हरपालपुर। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के गुटखा बाजार में इन दिनों जमाखोरी और कालाबाजारी का एक नया खेल देखने को मिल रहा है। वर्चस्व की इस जंग में स्थानीय बड़े दुकानदारों और जमाखोरों ने सिंडिकेट बनाकर आम उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया है।
    राजश्री के स्टॉक पर 'ताला', नए ब्रांड्स को बढ़ावा
    बाजार सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में सबसे ज्यादा बिकने वाले 'राजश्री गुटखा' की कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी गई है। स्थानीय जमाखोरों ने भारी मात्रा में राजश्री का स्टॉक दबा लिया है। इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
     महंगे दामों पर बिक्री: स्टॉक सीमित दिखाकर राजश्री गुटखा को निर्धारित प्रिंट रेट से कहीं अधिक ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
      नए ब्रांड्स की मार्केटिंग: बाजार में आए नए गुटखा ब्रांड्स की बिक्री नहीं हो पा रही थी। ऐसे में नामी ब्रांड्स (जैसे राजश्री) की सप्लाई रोककर ग्राहकों को मजबूरन नए और सस्ते गुटखा ब्रांड्स खरीदने पर विवश किया जा रहा है।
    उपभोक्ताओं की मजबूरी का फायदा
    जमाखोरी के चलते जहां एक ओर पुराने और स्थापित ब्रांड के लिए शौकीनों को अतिरिक्त पैसे चुकाने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुनाफाखोरी के चक्कर में दुकानदार नए ब्रांड्स को प्रमोट कर रहे हैं ताकि उनका कमीशन और मार्जिन बढ़ सके। हालत यह है कि फुटकर दुकानदार भी अब "माल पीछे से महंगा आ रहा है" का बहाना बनाकर कालाबाजारी को बढ़ावा दे रहे हैं।
    प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
    नगर में खुलेआम चल रही इस जमाखोरी और कालाबाजारी ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गोदामों की समय रहते जांच की जाए, तो भारी मात्रा में अवैध स्टॉक बरामद हो सकता है। फिलहाल, जमाखोरों के इस 'नए खेल' से गुटखा बाजार पूरी तरह प्रभावित है और आम आदमी इस आर्थिक लूट का शिकार हो रहा है।
    क्या आप चाहेंगे कि मैं इस खबर के लिए 'बुंदेली न्यूज़' (Bundeli News) के सोशल मीडिया हैंडल हेतु एक आकर्षक हेडलाइन या कोई ग्राफिक विचार भी तैयार करूँ?