व्यापार में मंदी, पर मानवता की सेवा में रजामंदी: सराफा व्यापारी ने दुकान छोड़ आदिवासी महिला को दिया जीवनदान
बक्सवाहा/जिला अस्पताल | चौमासा (मानसून) शुरू होते ही अक्सर व्यापारिक प्रतिष्ठानों में मंदी का दौर छा जाता है, लेकिन इंसानियत और सेवा के बाजार में कभी मंदी नहीं आती। इस बात को सच कर दिखाया है नगर के एक प्रतिष्ठित व्यापारी ने, जिन्होंने व्यापारिक मंदी के बावजूद मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक गरीब आदिवासी महिला की जान बचाई।मंदी का असर व्यापार पर, सेवाभाव पर नहींरक्तवीर सेवादल के प्रमुख सदस्य अमित जैन ने बताया कि इन दिनों बाजार में व्यापारिक मंदी का दौर चल रहा है। ग्राहकों की आवाजाही कम है, परंतु जब बात समाज के असहाय और पीड़ित लोगों की मदद की आती है, तो हमारे व्यापारिक बंधु पीछे नहीं हटते। उनका सेवाभाव आज भी अपने चरम पर है।हाल ही में जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी हो गई थी। इसी दौरान एक बेहद गरीब और जरूरतमंद मरीज अस्पताल पहुंची, जिसका जीवन संकट में था।एक सूचना और फरिश्ता बनकर पहुंचे व्यापारीघटना के अनुसार, बक्सवाहा निवासी एक गरीब आदिवासी महिला, सुनीता, को इलाज के दौरान रक्त की तत्काल और सख्त आवश्यकता थी। ब्लड बैंक में स्टॉक न होने के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई थी।इसी बीच इस आपात स्थिति की सूचना व्यापारी अनिल अग्रवाल को मिली। उन्होंने बिना एक पल गंवाए नगर के प्रतिष्ठित सराफा व्यापारी अल्लू रावत जी से संपर्क किया और उन्हें सुनीता की गंभीर स्थिति से अवगत कराया।सूचना मिलते ही अल्लू रावत जी ने इंसानियत को सर्वोपरि रखा:उन्होंने तुरंत अपने प्रतिष्ठान (दुकान) का काम रोका।बिना किसी देरी के वे सीधा जिला अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे।वहां पहुंचकर उन्होंने स्वेच्छा से अपना रक्तदान किया और आदिवासी पीड़िता सुनीता की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।”रक्तदान हमारा मानवीय कर्तव्य है”इस पुनीत कार्य को संपन्न करने के बाद, सराफा व्यापारी अल्लू रावत जी ने समाज को एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक संदेश दिया।”रक्तदान कोई जटिल काम नहीं, बल्कि यह एक बेहद ही सहज और सरल प्रक्रिया है। यह हम सभी का प्राथमिक और मानवीय कर्तव्य है कि जब भी किसी पीड़ित या जरूरतमंद को हमारी आवश्यकता हो, तो हम आगे आएं और रक्तदान कर उसकी मदद करें।”— अल्लू रावत (प्रतिष्ठित सराफा व्यापारी)समाज के लिए एक बड़ा संदेशयह घटना केवल एक महिला की जान बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और खासकर व्यापारिक वर्ग के लिए एक शानदार नजीर है। अमित जैन और रक्तवीर सेवादल ने इस कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। यह साबित करता है कि चाहे मौसम कैसा भी हो, या व्यापार में कितनी भी मंदी क्यों न हो, एक संवेदनशील हृदय हमेशा दूसरों की पीड़ा को समझता है।अल्लू रावत और अनिल अग्रवाल जैसे समाजसेवियों के कारण ही मानवता आज भी जिंदा है और हजारों जरूरतमंदों को हर दिन नया जीवन मिल रहा है।