नगर परिषद हरपालपुर में राजस्व का बड़ा खेल: सरकारी खजाने को लगा 20 लाख से ज्यादा का चूना, पूर्व सीएम के आदेश भी हवा में उड़े!
छतरपुर / हरपालपुर
नगर परिषद हरपालपुर में सरकारी खजाने को चपत लगाने और राजस्व की बंदरबांट का एक बड़ा मामला गरमाता नजर आ रहा है। बस स्टैंड व मंडी ट्रैक्टर-बैलगाड़ी वसूली के ठेके में निकाय को सीधे तौर पर ₹20.35 लाख का नुकसान हुआ है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री के आदेशों को ठंडे बस्ते में डालकर बाजार बैठकी के नाम पर भी बड़े घालमेल की आशंका जताई जा रही है।
इस पूरे मामले पर अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ने अब जनता के बीच आक्रोश और तीखे सवालों को जन्म दे दिया है।
📉 ठेके में 'झोल': ₹32 लाख से सीधे ₹11 लाख पर गिरा आंकड़ा!
सरकारी तंत्र में आंकड़े कैसे रातों-रात बदल दिए जाते हैं, इसका ताजा उदाहरण हरपालपुर में देखने को मिला:
वर्ष 2025-2026: बस स्टैंड और मंडी वसूली का ठेका ₹32,14,000 में गया था।
वर्ष 2026-2027: चालू वर्ष में यही ठेका औंधे मुंह गिरकर महज ₹11,79,000 में सिमट गया।
सीधा नुकसान: एक ही साल के भीतर निकाय को ₹20,35,000 के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा।
क्या है साजिश का आरोप?
स्थानीय लोगों के अनुसार, ठेका प्रक्रिया से ठीक एक महीने पहले निकाय प्रशासन ने खुद विभागीय स्तर पर वसूली की थी। आरोप है कि इसी एक महीने की वसूली के आंकड़ों को जानबूझकर घटाकर दिखाया गया, जिससे ठेके का ‘बेस प्राइस’ कम हो सके और मनपसंद लोगों को फायदा पहुँचाया जा सके।
🚫 शिवराज सरकार के आदेशों की धज्जियां, 3 साल से ‘खेल’ जारी!
मामला सिर्फ बस स्टैंड तक ही सीमित नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए बाजार बैठकी की ठेका प्रथा बंद कर सीधे पंजीकरण के निर्देश दिए थे।