निलंबन के अगले ही दिन छात्रावास से सामान ले जाने का कथित वीडियो वायरल, बच्चों ने लगाए गंभीर आरोप
हरपालपुर: मध्य प्रदेश के हरपालपुर स्थित बालक छात्रावास में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कलेक्टर मृणाल मीणा के औचक निरीक्षण के दौरान भारी अव्यवस्थाएं मिलने पर अधीक्षक इंद्रपाल अहिरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। अब निलंबन के ठीक अगले ही दिन छात्रावास से बोरियों में सामान भरकर बाहर ले जाने का एक वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है।
> नोट: सूत्रों के मुताबिक सामने आया यह कथित वीडियो और सामान ले जाने का पूरा मामला फिलहाल उच्चस्तरीय जांच का विषय है।>
बोरियों में सामान ले जाने का दावा
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, निलंबन आदेश जारी होने के 24 घंटे के भीतर ही छात्रावास परिसर से कई बोरियां बाहर ले जाई गईं।
सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय लोगों और छात्रों का दावा है कि इन बोरियों में छात्रावास के लिए आया राशन और सरकारी सामग्री थी। हालांकि, यह सामान वास्तव में क्या था और इसे कहां ले जाया जा रहा था, यह पूरी तरह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
बच्चों ने बयां किया दर्द, धमकियां मिलने का आरोप
छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी व्यथा रखी है।

बच्चों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से घटिया स्तर का भोजन दिया जा रहा था। मीनू के अनुसार मिलने वाला दूध, घी और फल कागजों तक ही सीमित थे। जब भी किसी छात्र ने इस बात का विरोध किया, तो अधीक्षक द्वारा उसका नाम काटने और छात्रावास से बाहर निकालने की धमकियां दी गईं।
छात्रों का कहना है कि वे डर के साए में रहकर व्यवस्थाओं को झेल रहे थे।शिक्षा विभाग का रुख मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने स्पष्ट किया है कि यदि छात्रावास की सरकारी सामग्री को बाहर ले जाकर बेचने या खुर्द-बुर्द करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि वायरल वीडियो और छात्रों के बयानों को जांच का आधार बनाया जा रहा है।जवाबदेही और सुरक्षा पर सवाल इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

* शासन स्तर से बच्चों के पोषण और सुविधाओं के लिए आने वाले लाखों रुपये के बजट का वास्तविक उपयोग कहां हुआ?
* निलंबन के बाद तुरंत छात्रावास का प्रभार और स्टॉक सील क्यों नहीं किया गया, जिससे सामान बाहर ले जाने जैसी स्थिति बनी?
* खुलकर शिकायत दर्ज कराने वाले मासूम छात्रों की मानसिक और शैक्षणिक सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?बच्चों के अधिकारों और सरकारी संसाधनों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अब एक निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच की दरकार है, ताकि हकीकत सामने आ सके और दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो।
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