हरपालपुर में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही: सरकारी स्कूल खाली, अवैध हॉस्टलों में बच्चों की ‘भरमार’!

Bundele News
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हरपालपुर (जिला-छतरपुर)।

नगर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐसा खेल पनप रहा है, जो आने वाले समय में सरकारी शिक्षा तंत्र को पूरी तरह खोखला कर देगा। एक तरफ सरकार शासकीय स्कूलों में दाखिला बढ़ाने और शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय शिक्षा विभाग की नाक के नीचे हरपालपुर में निजी हॉस्टलों और कोचिंग सेंटरों की बाढ़ आ गई है। स्थिति यह है कि सरकारी स्कूलों में बच्चे ढूंढने से नहीं मिल रहे, जबकि नगर की अवैध और नियम विरुद्ध चल रही हॉस्टलों में बच्चों की भारी भरमार है।

 इन कॉलोनियों में पैर पसार चुका है यह ‘खेल’

विश्वस्त सूत्रों और जमीनी पड़ताल के मुताबिक, हरपालपुर की राजपूत कॉलोनी, लहचूरा रोड, दुर्गा कॉलोनी, अरजरिया कॉलोनी समेत नगर की ऐसी कोई कॉलोनी नहीं बची है जहाँ इस तरह के हॉस्टल और तथाकथित आवासीय संस्थान न चल रहे हों। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश संस्थानों के पास न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही नियमों के मुताबिक मान्यता।

 बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव, सुरक्षा पर सवाल

‘बुंदेली न्यूज़’ का उद्देश्य किसी के व्यवसाय को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर उंगली उठाना है जो बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही है। इन हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है:

रहने-खाने की बदहाली: छात्र-छात्राओं के रहने और खाने-पीने की कोई उत्तम व्यवस्था नहीं है। छोटे-छोटे कमरों में क्षमता से अधिक बच्चों को ठूंस दिया गया है।

सुरक्षा और निजता गायब: लड़के और लड़कियों के हॉस्टलों के लिए जो कड़े सुरक्षा मापदंड होने चाहिए, उनका खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

 फर्जी हाजिरी और बड़े अपराध की आशंका (गंभीर विषय)

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इस पूरे खेल का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि हॉस्टलों के पास जितने क्लास तक की मान्यता है, उससे कहीं ज्यादा और बड़ी क्लास के बच्चों का एडमिशन कागजों पर दिखा दिया जाता है।

आशंका और बड़ा खतरा: कई बार ऐसा देखा गया है कि बच्चा कागजों में हॉस्टल के रिकॉर्ड में दर्ज है और वहाँ उसकी उपस्थिति लग रही है, लेकिन असलियत में वह दिल्ली, मुंबई या अन्य शहरों में मजदूरी कर रहा होता है। खुदा न खास्ता, अगर ऐसा कोई छात्र बाहर किसी गंभीर अपराध (क्राइम) में लिप्त पाया जाता है और जाँच में वह खुद को हरपालपुर के हॉस्टल में पढ़ता हुआ दिखा दे, तो यह न सिर्फ हॉस्टल संचालक बल्कि पूरे प्रशासन के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।

 सरकारी स्कूलों का गिरता स्तर, प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग

छात्र इन हॉस्टलों और निजी संस्थाओं के जाल में इसलिए फंस रहे हैं क्योंकि सरकारी स्कूलों में ‘डेली’ (रोज) आने की कड़ाई होती है, जबकि यहाँ कागजी खानापूर्ति आसानी से हो जाती है। यदि शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन ने इन बातों को नजरअंदाज करना बंद नहीं किया, तो हर वर्ष सरकारी स्कूलों में एडमिशन का स्तर और गिरता जाएगा।

‘बुंदेली न्यूज़’ प्रशासन से आग्रह करता है कि नगर में संचालित हो रहे समस्त हॉस्टलों की मान्यता, उनके रिकॉर्ड और वहाँ रह रहे बच्चों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कर तुरंत ठोस कानूनी कार्रवाई की जाए

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