ब्रेकिंग न्यूज़: हरपालपुर में शराब माफियाओं का खुला खेल, चाय-पान की टपरियों पर कौड़ियों के भाव बिक रहा ‘जहर’; क्या प्रशासन को है किसी बड़े हादसे का इंतज़ार?
हरपालपुर (छतरपुर): मध्य प्रदेश के सागर में हुए भीषण शराब कांड के बाद भी आबकारी और स्थानीय प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। हरपालपुर नगर में इन दिनों शराब माफियाओं ने अपना समानांतर साम्राज्य खड़ा कर लिया है। नगर में स्वीकृत दो सरकारी शराब दुकानों के सिंडिकेट ने मुनाफा खोरी के चक्कर में पूरे कस्बे को अवैध शराब के अड्डों में तब्दील कर दिया है। हालात इतने बदतर हैं कि नगर में दूध भले समय पर न मिले, लेकिन हर 50 कदमों की दूरी पर चाय-पान की गुमटियों पर अवैध देसी व अंग्रेजी शराब धड़ल्ले से उपलब्ध कराई जा रही है।
25,000 की सिक्योरिटी लेकर खुलेआम बांटी जा रही शराब स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शराब ठेकेदार अपने प्रभाव क्षेत्र में अवैध पॉइंट चलवाने के लिए टपरी और गुमटी संचालकों से ₹25,000 की सिक्योरिटी डिपॉजिट ले रहे हैं। इसके बाद इन ठिकानों पर खुलेआम शराब की खेप उतार दी जाती है। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि निर्धारित सरकारी दर से काफी कम दामों पर शराब बेची जा रही है। जिस देसी पउए का सरकारी प्रिंट रेट ₹73 है, वह बाजार में ₹100 के तीन दिए जा रहे हैं, जबकि महंगी अंग्रेजी शराब की बोतलें ₹400 से ₹500 में बेची जा रही हैं।
सागर हादसे के बाद भी सबक नहीं, क्या फिर होगी बड़ी त्रासदी? सरकारी तय दरों से आधी कीमत पर शराब बिकने से सीधे तौर पर नकली और जहरीली शराब के खपने का गहरा अंदेशा पैदा हो रहा है। हाल ही में सागर में अवैध और संदिग्ध शराब के सेवन से हुई मौतों का दर्द अभी सूखा भी नहीं है कि हरपालपुर में उसी राह पर बड़ा हादसा आकार ले रहा है। बिना किसी गुणवत्ता नियंत्रण के बिक रही यह सस्ती शराब कभी भी कस्बे में दर्जनों परिवारों को उजाड़ सकती है, लेकिन आबकारी और पुलिस महकमा आंखें मूंदे बैठा है।

रेलवे स्टेशन के पास खुली दुकान बनी यात्रियों के लिए नासूर समस्या केवल अवैध टपरियों तक सीमित नहीं है। हरपालपुर रेलवे स्टेशन के बिल्कुल नजदीक स्थित शासकीय शराब दुकान आम यात्रियों और स्थानीय नागरिकों के लिए गंभीर सिरदर्द बन चुकी है। नियमों को ताक पर रखकर संचालित इस दुकान के आसपास दिन-रात पियक्कड़ों का जमावड़ा लगा रहता है। लोग वहीं शराब पीकर सीधे स्टेशन परिसर में घुसते हैं और उत्पात मचाते हैं।
स्टेशन पर आने वाली महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों के साथ आए दिन अभद्र व्यवहार, छींटाकशी और गाली-गलौज की घटनाएं सामने आ रही हैं। स्टेशन के बिल्कुल मुहाने पर इस तरह का माहौल किसी भी दिन बड़ी आपराधिक वारदात या अप्रिय घटना को न्योता दे सकता है।
स्थानीय नागरिकों की सख्त मांग कस्बे के जागरूक नागरिकों और व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन से दो टूक मांग की है कि:
- रेलवे स्टेशन की सुरक्षा और यात्रियों की मर्यादा को देखते हुए स्टेशन समीप की शराब दुकान को तत्काल प्रभाव से नगर से बाहर या रेलवे क्षेत्र से दूर विस्थापित किया जाए।
- सागर जैसी त्रासदी से बचने के लिए नगर में चाय-पान की टपरियों पर ₹25,000 की आड़ में चल रहे अवैध शराब रैकेट पर तत्काल छापेमारी कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
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