म.प्र. में पटवारियों की अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू, राजस्व कामकाज ठप; 5 सूत्रीय मांगों पर अड़ा संघ

Bundele News
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नौगाँव अपनी 5 सूत्रीय मांगों की लंबे समय से हो रही उपेक्षा से नाराज मध्यप्रदेश भर के पटवारी सोमवार, 3 अगस्त से अनिश्चितकालीन ‘कलमबंद हड़ताल’ पर चले गए हैं। प्रदेश भर के पटवारियों ने अपने-अपने तहसील एवं जिला मुख्यालयों पर अपने सरकारी बस्ते जमा करा दिए हैं। इस हड़ताल के कारण प्रदेश भर में राजस्व से जुड़े तमाम अहम कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं, जिसका सीधा असर किसानों और आम जनता पर पड़ेगा।
​भोपाल में हुई बैठक में लिया गया कड़ा निर्णय
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के आह्वान पर रविवार, 2 अगस्त को भोपाल में प्रांतीय कार्यकारिणी और प्रदेश के 55 जिलों के जिलाध्यक्षों की एक अहम बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सर्वसम्मति से यह कड़ा निर्णय लिया गया कि जब तक शासन उनकी वेतनमान विसंगति और प्रमोशन सहित 5 सूत्रीय मांगों का निराकरण नहीं करता, तब तक कोई भी पटवारी काम पर नहीं लौटेगा। संघ ने स्पष्ट किया है कि बिना शीर्ष नेतृत्व के आदेश के कोई भी कर्मचारी हड़ताल से वापस नहीं आएगा।
​किसानों और आमजन को होगी भारी परेशानी
पटवारियों के हड़ताल पर जाने से प्रदेश भर में नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, गिरदावरी, भू-अभिलेख, फसल सर्वे और राजस्व अभिलेख से संबंधित सभी आवश्यक सेवाएं प्रभावित होंगी।
​मध्यप्रदेश पटवारी संघ, छतरपुर के जिला संघर्ष समिति के अध्यक्ष श्री हारून अहमद और नौगांव पटवारी संघ के अध्यक्ष परमवीर राय ने बताया कि संघ लंबे समय से शासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित कर रहा था, लेकिन आज दिनांक तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। नौगांव सहित पूरे जिले के पटवारियों ने एकजुटता दिखाते हुए अपने बस्ते जमा कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हड़ताल के कारण किसानों और आमजन को होने वाली असुविधा के लिए पूरी तरह से मध्यप्रदेश शासन ही जिम्मेदार होगा, क्योंकि संघ की मांगें पूर्णतः न्यायोचित और वैध हैं।
​पटवारी संघ की 5 प्रमुख मांगें:
​कैडर रिव्यू:
पटवारी संवर्ग का कैडर रिव्यू तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
​वेतनमान विसंगति: वेतनमान की विसंगतियों को दूर कर पटवारियों को सम्मानजनक वेतनमान प्रदान किया जाए।
​पदोन्नति का अधिकार: पटवारी संवर्ग के लिए प्रमोशन (पदोन्नति) का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
​समयमान वेतनमान: लंबे समय से लंबित समयमान वेतनमान और सेवा संबंधी अन्य विसंगतियों का तुरंत निराकरण किया जाए।
​सेवा अधिकारों की रक्षा: पटवारी संवर्ग के न्यायोचित सेवा अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए शासन द्वारा तत्काल आवश्यक निर्णय लिए जाएं।
​पटवारी संघ ने अपनी इस लड़ाई को अधिकारों, संवर्ग के सम्मान और किसान कल्याण की लड़ाई बताया है। “संघे शक्ति कलियुगे” के नारे के साथ संघ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।

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