सरसेड़ पंचायत में विकास के नाम पर सरकारी खजाने की खुली लूट: 1200 की लाइट 6100 में खरीदी,
6 माह से बंद पड़े आंगनवाड़ी निर्माण का भी निकाल लिया भुगतान; पंच रामेश्वर भदौरिया ने कलेक्टर से की शिकायत
छतरपुर। जिले की जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सरसेड़ इन दिनों वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार का केंद्र बनी हुई है। सरपंच और सचिव की मिलीभगत के चलते पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर आई सरकारी राशि की बंदरबांट का गंभीर मामला सामने आया है। स्थिति यह है कि महज एक माह के भीतर ‘कार्यालय व्यय’ व ‘अन्य खर्चों’ की मद से लाखों रुपये की निकासी कर ली गई। इस पूरे मामले को लेकर ग्राम पंचायत के पंच रामेश्वर भदौरिया ने साक्ष्यों के साथ जिला प्रशासन के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
बाजार भाव 1200, पंचायत ने लाइट खरीदी 6100 रुपये में शिकायतकर्ता पंच रामेश्वर भदौरिया के अनुसार पंचायत में स्ट्रीट लाइट और सोलर लाइट लगाने के नाम पर भारी फर्जीवाड़ा किया गया है:
- खुले बाजार में 1,000 से 1,200 रुपये में मिलने वाली सोलर व स्ट्रीट लाइटों को पंचायत रिकॉर्ड में 6,100 रुपये प्रति लाइट की दर से खरीदा दर्शाया गया।
- वास्तविक बाजार दर से करीब पांच गुना अधिक कीमत का बिल लगाकर सरकारी धन का गबन किया गया।

6 माह से अधूरा पड़ा है आंगनवाड़ी भवन, निर्माण के नाम पर निकलता रहा भुगतान पंच रामेश्वर भदौरिया ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार केवल सामग्री खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण कार्यों में भी कागजी खेल जारी है। गांव में स्वीकृत आंगनवाड़ी केंद्र का निर्माण कार्य पिछले 6 महीनों से पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है। धरातल पर काम ठप होने के बावजूद सरपंच और सचिव द्वारा मिलीभगत कर आंगनवाड़ी निर्माण कार्य के नाम पर लगातार सरकारी खजाने से भुगतान आहरित किया जा रहा है।

जन समस्या निवारण शिविर में कलेक्टर को सौंपे साक्ष्य शिकायतकर्ता पंच रामेश्वर भदौरिया ने जिला स्तरीय जन समस्या निवारण शिविर में कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर विस्तृत शिकायती आवेदन सौंपा। भदौरिया ने आवेदन के साथ पंचायत द्वारा निकाली गई राशि के बिल, वाउचर और निर्माण कार्य बंद होने के जमीनी दस्तावेज बतौर सबूत पेश किए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग रखी है।
विवादित रहा है सचिव का ट्रैक रिकॉर्ड: पहले भी दर्ज हो चुका है 420 का मुकदमा शिकायतकर्ता का कहना है कि सरपंच कल्लू प्रजापति और सचिव रामगोपाल शर्मा पर इन शिकायतों का कोई असर नहीं दिख रहा है। सचिव रामगोपाल शर्मा की कार्यप्रणाली पहले से ही संदेह के घेरे में रही है। इससे पूर्व जब वे ग्राम पंचायत रानीपुरा में पदस्थ थे, तब भी वित्तीय गड़बड़ियों के चलते उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बावजूद उन्हें सरसेड़ पंचायत का प्रभार सौंपा जाना प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है।

‘कार्यालय व्यय’ और ‘अन्य खर्चों’ के नाम पर लाखों की निकासी

पंच रामेश्वर भदौरिया ने अपनी शिकायत में प्रमुखता से उठाया है कि पंचायत ने केवल सामग्री खरीद में ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक खर्चों में भी बड़ा खेल किया है। शिकायत के अनुसार, सरपंच और सचिव ने महज एक महीने के अंतराल में ‘कार्यालय व्यय’ और ‘अन्य खर्चों’ जैसे संदिग्ध मदों का हवाला देकर सरकारी खजाने से लाखों रुपये की मोटी रकम निकाल ली। इन कथित खर्चों का न तो कोई ठोस औचित्य है और न ही पंचायत रिकॉर्ड में इनके पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं, जो सीधे तौर पर सरकारी राशि के गबन की ओर इशारा करते हैं।

कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी पंच रामेश्वर भदौरिया ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जांच दल गठित कर दोषियों के खिलाफ गबन की राशि की वसूली, निलंबन और एफआईआर की कार्रवाई नहीं की गई, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।
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