व्रत में भी नहीं रुकी सेवा, अमित जैन ने किया 64वां रक्तदान
पर्युषण पर्व के व्रत के बीच रक्तदान कर दिया मानवता का संदेश
छतरपुर। सेवा का संकल्प परिस्थितियों का मोहताज नहीं होता—इसी भावना को चरितार्थ करते हुए शहर के बड़कुल चौक निवासी एवं रक्तवीर सेवा दल से जुड़े अमित जैन ने अपना 64वां रक्तदान किया। पर्युषण पर्व के चलते व्रत होने के बावजूद उन्होंने जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए रक्तदान का संकल्प पूरा किया।
अमित जैन लंबे समय से स्वयं रक्तदान करने के साथ-साथ समाज के लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक कर उन्हें इस पुनीत कार्य से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि रक्त की जरूरत किसी भी व्यक्ति को कभी भी पड़ सकती है और ऐसे समय में एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद के लिए जीवन बचाने का माध्यम बन सकता है।
उन्होंने बताया कि इस बार रक्तदान का अवसर उनके लिए इसलिए भी विशेष रहा, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस और भगवान विश्वकर्मा जयंती का पावन संयोग था। उन्होंने इस विशेष अवसर को मानव सेवा के लिए समर्पित करते हुए रक्तदान किया।
भ्रांतियां छोड़ें, सही जानकारी अपनाएं

अमित जैन ने कहा कि समाज में रक्तदान को लेकर कई भ्रांतियां अभी भी मौजूद हैं। लोगों को रक्तदान से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय मानकों की जानकारी लेनी चाहिए तथा योग्य होने पर नियमित रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जरूरतमंद के जीवन को बचाने में दिया गया अमूल्य योगदान है।
उन्होंने युवाओं और समाज के लोगों से अपील की कि वे रक्तदान को लेकर जागरूक हों और अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उनका उद्देश्य है कि छतरपुर में जरूरत के समय किसी भी मरीज को रक्त की कमी के कारण परेशानी न हो।
64 बार रक्तदान के इस पड़ाव पर अमित जैन ने एक बार फिर यही संदेश दिया कि—
“रक्तदान करें, जीवन बचाएं और मानवता की सेवा में अपना योगदान दें।”
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