शिक्षा के एक स्वर्णिम अध्याय का समापन: शिक्षक राजू अहिरवार की विदाई में उमड़ा जनसैलाब
छतरपुर/ईशानगर।स्थानीय क्षेत्र ईशानगर के शासकीय हाई स्कूल, बौड़ा में आज शिक्षा के एक युग का अंत और स्वर्णिम अध्याय का समापन हुआ। विद्यालय के अत्यंत लोकप्रिय, कर्तव्यनिष्ठ और वरिष्ठ शिक्षक राजू अहिरवार अपने 35 वर्षों के बेदाग और गौरवशाली सेवाकाल के बाद आज सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर विद्यालय प्रांगण में एक भव्य और भावुक विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें पूरे क्षेत्र का जनसैलाब उमड़ पड़ा। नम आँखों और भारी मन से क्षेत्रवासियों और छात्रों ने अपने प्रिय गुरु को विदाई दी।
समारोह के मुख्य आकर्षण:मां सरस्वती की वंदना और सम्मान समारोहकार्यक्रम का शुभारंभ विद्या की देवी मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यालय के प्रधानाचार्य, साथी शिक्षकों और प्रबंधन समिति द्वारा राजू अहिरवार जी को शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय सम्मान किया गया। इस ऐतिहासिक विदाई समारोह में विद्यालय के वर्तमान छात्र, पूर्व छात्र, शिक्षक साथी और क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक भारी संख्या में उपस्थित रहे।
विदाई गीतों ने किया सभी को भावुक कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपने प्रिय गुरुजी के लिए विशेष विदाई गीत प्रस्तुत किए। इन गीतों के बोल सुनकर प्रांगण में मौजूद हर व्यक्ति की आँखें छलक उठीं। कई छात्रों ने मंच पर आकर राजू सर के साथ बिताए गए पलों को साझा किया। छात्रों ने बताया कि सर ने केवल किताबी ज्ञान तक ही उन्हें सीमित नहीं रखा, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने और सही राह पर चलने का पाठ भी पढ़ाया।
‘शिक्षण मेरे लिए पेशा नहीं, आत्मा का हिस्सा है’
अपने विदाई भाषण में राजू अहिरवार जी खुद को भावुक होने से नहीं रोक पाए। उन्होंने भरे गले से अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा:”शिक्षण मेरे लिए कभी केवल एक पेशा नहीं रहा, बल्कि यह मेरी आत्मा का हिस्सा है। बच्चों के बीच बिताया गया एक-एक दिन मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। मैं आज भले ही इस शासकीय पद से सेवानिवृत्त हो रहा हूँ, लेकिन एक शिक्षक के रूप में मेरा मार्गदर्शन और आशीर्वाद हमेशा मेरे छात्रों के साथ रहेगा।”उन्होंने अपने 35 साल के लंबे सफर में साथ देने वाले सभी सहयोगियों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन का हृदय से आभार व्यक्त किया।
अनुशासन और सादगी की मिसाल थे राजू सर
समारोह में उपस्थित सहकर्मी शिक्षकों ने उनके कार्यकाल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। वक्ताओं ने उनके जीवन की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा:
अनुशासन और समयबद्धता: विद्यालय में उनका अनुशासन और समय का पालन करना सभी के लिए एक मिसाल था।
कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान: उन्होंने हमेशा पढ़ाई में कमजोर छात्रों को मुख्यधारा में लाने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए।सफल छात्रों की फौज: उनके पढ़ाए हुए अनगिनत छात्र आज देश के विभिन्न प्रदेशों में उच्च पदों पर आसीन हैं और समाज में अपने गुरु का नाम रोशन कर रहे हैं।
‘गुरुदेव अमर रहें’ के नारों से गूंजा प्रांगण
कार्यक्रम के अंतिम चरण में विदाई की बेला अत्यंत मार्मिक हो गई। वहां उपस्थित सभी लोगों ने अपने स्थान पर खड़े होकर (स्टैंडिंग ओवेशन) और लगातार तालियां बजाकर उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी। पूरा विद्यालय प्रांगण गुरु जी अमर रहें’ और ‘धन्यवाद सर’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।यह भव्य विदाई समारोह इस बात का जीवंत प्रतीक था कि समाज में एक सच्चे और समर्पित शिक्षक का स्थान हमेशा सर्वोच्च रहता है। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार, पूर्व छात्रों और ग्रामीणों ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं मंगलमय सेवानिवृत्त जीवन की ईश्वर से कामना की।
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