विकास के चार साल या भ्रष्टाचार का जाल: नगर परिषद हरपालपुर के दावों की खुली पोल, जनता की कसौटी पर फेल साबित हुआ कार्यकाल
हरपालपुर। नगर परिषद हरपालपुर के चार वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर अब नगर के विकास और प्रशासनिक दावों की जमीनी हकीकत खुलकर सामने आने लगी है। नगर के गणमान्य नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग ने परिषद के कामकाज का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। स्थानीय जनता का सीधा आरोप है कि बीते चार वर्षों में नगर का वास्तविक विकास तो नहीं हुआ, लेकिन भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और अव्यवस्था अपने चरम पर पहुंच गई।
नागरिकों ने बिंदुवार तरीके से नगर की प्रमुख समस्याओं और परिषद की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है:

- 10 दिन पानी, महीने भर की वसूली: नगर में पेयजल सप्लाई की स्थिति दयनीय है। जनता को तीन दिन में एक बार पानी मिलता है, यानी महीने में केवल 10 दिन ही जलापूर्ति होती है। इसके बावजूद परिषद द्वारा पूरे महीने का 92 रुपये जलकर वसूला जा रहा है, जिसे लेकर आम जनमानस में भारी आक्रोश है।
- सब्जी मंडी में प्रतिदिन अवैध वसूली, रसीद तक नहीं: नगर की सब्जी मंडी में छोटे व्यापारियों और फुटकर दुकानदारों से परिषद के नाम पर हर दिन पैसे वसूले जाते हैं, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि उन्हें कोई आधिकारिक रसीद तक नहीं दी जाती। यह खुले तौर पर अवैध वसूली का जरिया बना हुआ है, जिसकी राशि सीधे जिम्मेदारों की जेब में जाने की चर्चा है।
- पीएम आवास योजना में खुली घूसखोरी: सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में जमकर कमीशनखोरी चल रही है। नगर में यह चर्चा आम है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्त जारी कराने के एवज में गरीब हितग्राहियों से 25 हजार से लेकर 40 हजार रुपये तक की रिश्वत ली जा रही है।
- अतिक्रमण मुहिम बनी उगाही का जरिया: कुछ माह पूर्व लहचूरा रोड पर अतिक्रमण हटाने की मुहिम चली, जिसे कुछ मकान तोड़ने के बाद अचानक रोक दिया गया। आरोप है कि शेष बचे लोगों को कार्रवाई का डर दिखाकर प्रति वर्ग फुट के हिसाब से 50 हजार रुपये तक की मांग की गई और अंदरखाने मामला रफा-दफा कर दिया गया। वहीं, राजपूत कॉलोनी गर्ल्स स्कूल रोड पर नाला निर्माण का कार्य बीच में ही रुका पड़ा है।
- कागजों में हरा-भरा हुआ नगर: वित्तीय वर्ष 2026-27 में वृक्षारोपण के नाम पर 5 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया। कागजों में पूरे नगर में पौधे रोप दिए गए, लेकिन जमीनी हकीकत में वे नदारद हैं। जनता सवाल पूछ रही है कि अगर औसतन पौधे की कीमत 100 से 500 रुपये है, तो 5 लाख के पौधे जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहे?
- बनाना और गिराना ही बना ‘विकास’: बस स्टैंड पर कुछ वर्ष पूर्व लाखों की लागत से एक भवन का निर्माण कराया गया था, जिसका एक दिन भी उपयोग नहीं हुआ। अब उसी भवन को गिराकर दोबारा नया निर्माण कराने की तैयारी है। सरकारी पैसे की इस बर्बादी और औने-पौने दामों में तोड़ने का वर्कऑर्डर जारी करने पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- नियम ताक पर, बस स्टैंड पर शराब दुकान: आम नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा को दरकिनार करते हुए बस स्टैंड परिसर की दुकानों में नियमों के विपरीत शराब दुकान संचालित कराने की खुली छूट दी गई है।
- गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य: बीते चार वर्षों में कराए गए सीसी रोड और नाली निर्माण कार्यों ने चंद महीनों में ही दम तोड़ दिया। घटिया निर्माण सामग्री के चलते सड़कें जगह-जगह से उखड़ने लगी हैं।
- कमीशन का खेल और टेंडर सिस्टम: निर्माण एजेंसियों को टेंडर आवंटित करने के बाद 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन मांगने की शिकायतें आम हैं। जो ठेकेदार शर्तों पर नहीं झुकते, उन्हें ब्लैकलिस्ट करने का दबाव बनाया जाता है।

- कबाड़ हुए CCTV और AQI सिस्टम: नगर की सुरक्षा और निगरानी के नाम पर लगाए गए CCTV कैमरे सिर्फ कागजी फाइलों में चालू हैं। वहीं एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) जैसी महंगी मशीनें उचित रखरखाव न होने के कारण कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं।
- धार्मिक आस्था पर चोट: लहचूरा रोड स्थित हरिहर कुटी तालाब, जो वर्षों से हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है, उसकी दशा खराब कर दी गई है। तालाब के समीप लाखों की लागत से पार्क तो बनाया गया, लेकिन नगर की गंदी नालियों का रुख उसी तालाब की ओर मोड़कर पवित्र स्थल को गंदे जल संग्रह में बदल दिया गया।
जनता का आक्रोश चार साल के कथित विकास की हकीकत सामने आने के बाद हरपालपुर की जनता में भारी रोष है। नागरिकों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं से महरूम और भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता अब पूरी तरह जागरूक हो चुकी है। जनभावनाओं से खिलवाड़ करने वाले जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों को आने वाले समय में इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
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