झांसी-मानिकपुर रूट पर बड़ा बदलाव: बदौसा–अतर्रा–खुरहंड दोहरीकृत रेल खंड का हुआ सफल निरीक्षण, 120 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ी ट्रेनबांदा/झांसी: बुंदेलखंड के रेल यात्रियों और माल-परिवहन से जुड़े व्यापारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है।
झांसी–मानिकपुर दोहरीकरण परियोजना के तहत बदौसा–अतर्रा–खुरहंड रेल खंड का दोहरीकरण और विद्युतीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। उत्तर-पूर्व परिमंडल के रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) श्री प्रणजीव सक्सेना ने इस नव-निर्मित खंड का दो दिवसीय सघन निरीक्षण किया। सभी सुरक्षा मानकों पर शत-प्रतिशत खरा उतरने के बाद, इस ट्रैक पर रेलगाड़ियों का संचालन भी विधिवत रूप से शुरू कर दिया गया है।निरीक्षण में शामिल रहे रेलवे के आला अधिकारीइस महत्वपूर्ण संरक्षा निरीक्षण के दौरान रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) श्री अजीत सिंह यादव और झांसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री अनिरुद्ध कुमार की उपस्थिति में सम्पूर्ण निरीक्षण प्रक्रिया संपन्न हुई। अधिकारियों ने इस पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।

दूसरे दिन का सघन जायजा: ट्रैक से लेकर पुलों तक की हुई जांचनिरीक्षण के दूसरे दिन रेल संरक्षा आयुक्त ने गेट संख्या 472 से खुरहंड रेलवे स्टेशन के मध्य रेल खंड का बेहद बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर फोकस किया गया:रेल पथ (ट्रैक) और इंफ्रास्ट्रक्चर: ट्रैक की ज्यामिति (Geometry) और उस पर की गई बैलास्टिंग (गिट्टी) की जांच की गई।पुलों का सूक्ष्म परीक्षण: रास्ते में पड़ने वाले छोटे (माइनर) और बड़े (मेजर) पुलों का गहन निरीक्षण किया गया। पुलों के पिलर में इस्तेमाल किए गए निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, उनकी संरचनात्मक मजबूती और रखरखाव के तरीकों को गहराई से परखा गया।खुरहंड स्टेशन पर सिग्नलिंग और तकनीकी उपकरणों की जांचट्रैक और पुलों के निरीक्षण के बाद सीआरएस श्री सक्सेना खुरहंड रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां उन्होंने रेलवे संचालन की दृष्टि से अति-संवेदनशील कक्षों का सघन निरीक्षण किया:स्टेशन भवन और स्टेशन मास्टर कक्ष का जायजा लिया।मेंटेनेंस रूम, आईपीएस (IPS) रूम और रिले रूम में जाकर पैनल कार्यप्रणाली को समझा।संरक्षा उपकरणों, सिग्नलिंग और दूरसंचार (टेलीकॉम) प्रणालियों के काम करने के तरीके को देखा और संबंधित अधिकारियों से तकनीकी जानकारी भी तलब की।ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को निर्देश दिए गए कि वे सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करें और अनुरक्षण (मेंटेनेंस) कार्यों को तय मानकों के अनुरूप ही संचालित करें।

120 किमी/घंटे की रफ्तार से हुआ सफल स्पीड ट्रायलस्टेशन और ट्रैक के निरीक्षण में सभी संरक्षा और तकनीकी मानकों से पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद, इस नव दोहरीकृत एवं विद्युतीकृत रेल खंड पर 120 किलोमीटर प्रति घंटा की तूफानी रफ्तार से ट्रेनों का स्पीड ट्रायल किया गया। यह ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा, जिसने इस ट्रैक की मजबूती और सुरक्षा पर मुहर लगा दी।उसी शाम से शुरू हुआ ट्रेन संचालनइस निरीक्षण की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि निरीक्षण खत्म होने के कुछ ही समय बाद रेल संरक्षा आयुक्त और प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर की ओर से ट्रैक के उपयोग की आधिकारिक मंजूरी (ऑथराइजेशन) दे दी गई। इसी के साथ, उसी दिन शाम से इस नए रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन प्रारम्भ कर दिया गया है।बुंदेलखंड को क्या होगा फायदा?झांसी–मानिकपुर रूट पर खुरहंड–अतर्रा–बदौसा रेल खंड का दोहरीकरण पूरा होने से इस पूरे क्षेत्र को दूरगामी लाभ होंगे:ट्रेनों की लेटलतीफी में कमी: सिंगल लाइन होने की वजह से क्रॉसिंग के दौरान जो ट्रेनें खड़ी रहती थीं, अब वे निर्बाध गति से चल सकेंगी।सुरक्षित और सुगम सफर: दोहरीकरण और विद्युतीकरण से रेल परिचालन पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और समयबद्ध होगा।माल ढुलाई में तेजी: यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों का आवागमन तेज होगा, जिससे स्थानीय उद्योगों को कच्चा माल जल्दी मिलेगा और तैयार माल तेजी से मंडियों तक पहुंचेगा।आर्थिक विकास को गति: यह रेलवे लाइन बुंदेलखंड क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी, जिससे रोजगार और व्यापार के नए अवसर सृजित होंगे।
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