विशेष खबर: आज शान से लहरा रहा है तिरंगा, पर क्या आप जानते हैं इसे किसने और कब दिया था यह स्वरूप?

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विशेष खबर: आज शान से लहरा रहा है तिरंगा, पर क्या आप जानते हैं इसे किसने और कब दिया था यह स्वरूप?
​नई दिल्ली: 15 अगस्त को पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा हुआ है। हर गली, मोहल्ले और घर पर आन-बान-शान से लहराता तिरंगा हर भारतवासी के दिल में देशभक्ति का जज्बा भर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे इस राष्ट्रीय ध्वज की रूपरेखा किसने तैयार की थी और यह वर्तमान स्वरूप में कैसे पहुंचा?
​पिंगली वेंकैया: तिरंगे के मुख्य सूत्रधार
भारत के राष्ट्रीय ध्वज की मूल रूपरेखा तैयार करने का श्रेय आंध्र प्रदेश के महान स्वतंत्रता सेनानी और कृषि वैज्ञानिक पिंगली वेंकैया को जाता है। उन्होंने वर्ष 1916 से 1921 के बीच कई देशों के झंडों का गहन अध्ययन किया और एक ऐसा राष्ट्रीय प्रतीक तैयार करने का बीड़ा उठाया जो पूरे देश को एकता के सूत्र में बांध सके।
​1921 में रखा गया आधार
वर्ष 1921 में विजयवाड़ा में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पिंगली वेंकैया ने महात्मा गांधी को तिरंगे का प्रारंभिक प्रारूप सौंपा।
​शुरुआत में इसमें दो मुख्य पट्टियां—लाल (हिंदू) और हरा (मुस्लिम) थीं।
​बाद में गांधीजी के सुझाव पर देश के बाकी सभी समुदायों और शांति के प्रतीक के तौर पर इसमें सफेद पट्टी और आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में चरखा जोड़ा गया।
​चरखे की जगह अशोक चक्र और 22 जुलाई 1947 का ऐतिहासिक दिन
देश की स्वतंत्रता से ठीक पहले, डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता वाली ध्वज समिति ने राष्ट्रीय ध्वज को सर्वसमावेशी रूप देने का निर्णय लिया।
​ध्वज में मौजूद चरखे की जगह सम्राट अशोक के सारनाथ स्तंभ से 24 तीलियों वाला धर्म चक्र (नेवी ब्लू रंग) शामिल किया गया।
​इस नए और वर्तमान स्वरूप को तैयार करने में सुरैया तैयबजी और बदरुद्दीन तैयबजी की भी अहम भूमिका रही।
​22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इस तिरंगे को आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया।
​तिरंगे के रंगों का संदेश
केसरिया: साहस, बलिदान और शौर्य का प्रतीक।
सफेद: शांति, सत्य और पवित्रता का संदेश।
​हरा: खुशहाली, समृद्धि और भारत की उर्वर भूमि का प्रतीक।
​अशोक चक्र: निरंतर प्रगति और धर्म का मार्ग।
​आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, तब इस ध्वज को स्वरूप देने वाले अमर सपूतों का योगदान हमें सदैव अपने गौरवशाली इतिहास और एकता की याद दिलाता रहेगा।

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