हरपालपुर बाईपास भूमि घोटाला:

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हरपालपुर बाईपास भूमि घोटाला: ‘लिपिकीय त्रुटि’ की आड़ में बेशकीमती सरकारी जमीन निगलने की साजिश, भू-माफिया और अधिकारियों का नापाक गठजोड़

छतरपुर/हरपालपुर: मध्य प्रदेश के मुखिया एक तरफ भू-माफियाओं पर बुलडोजर चलाने और उन्हें नेस्तनाबूद करने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं के बेलगाम अधिकारी चंद रुपयों के लालच में शासन की बेशकीमती जमीनों को भू-माफियाओं की झोली में डालने का खेल खेल रहे हैं। ताजा और बेहद चौंकाने वाला मामला हरपालपुर बाईपास से सटकर स्थित बेशकीमती जमीन का है, जहां दलालों और जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ से एक बड़ा ‘जमीन घोटाला’ रचे जाने की बू आ रही है।
क्या है पूरा मामला: दो पत्रों का विरोधाभास और ‘खेल’
जानकारी के अनुसार, हरपालपुर बाईपास के समीप स्थित सरकारी और बेशकीमती जमीन को निजी हाथों में सौंपने के लिए लोक निर्माण विभाग छतरपुर (sdo अनुविभागीय अधिकारी) द्वारा श्री राम स्वरूप के आदेश से दो अलग-अलग पत्र जारी किए गए। पहला पत्र 13 अप्रैल 2026 को और दूसरा इसके ठीक बाद 8 जून 2026 को जारी हुआ। हैरानी की बात यह है कि एक ही विषय पर जारी इन दोनों सरकारी पत्रों में भारी विरोधाभास है।


इन पत्रों में जानबूझकर दर्शाया गया कि सड़क के बीचों-बीच से (दक्षिण की तरफ) केवल 15 मीटर का दायरा है। जबकि वास्तविकता इससे कोसों दूर है। शासन द्वारा इस हाईवे के लिए 45 मीटर की जगह आवंटित की गई है, जिसकी पुष्टि कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer) कार्यालय में मौजूद सरकारी नक्शे से साफ-साफ होती है।
RTI में हुआ खुलासा, तो अधिकारी ने झाड़ा पल्ला
जब शिकायतकर्ता ने इस पूरे फर्जीवाड़े की भनक लगने पर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी, तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की सुनवाई के लिए शिकायतकर्ता को सागर में अपील की पेशी पर बुलाया गया।
सागर में जब कार्यपालन यंत्री के समक्ष लोक निर्माण विभाग छतरपुर (sdo अनुविभागीय अधिकारी) द्वारा जारी किए गए इन दोनों विरोधाभासी आदेशों की प्रति रखी गई और 45 मीटर वाले असली नक्शे से इसका मिलान हुआ, तो अधिकारी निरुत्तर हो गए। खुद को फंसता देख लोक निर्माण विभाग छतरपुर (sdo अनुविभागीय अधिकारी) के जिम्मेदार अधिकारी ने इन पत्रों को महज एक “लिपिकीय त्रुटि” (Clerical Mistake) बताकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की।


यहाँ उठते हैं गंभीर सवाल:
क्या हाईवे जैसी महत्वपूर्ण परियोजना की जमीन नापने में इतनी बड़ी ‘लिपिकीय त्रुटि’ हो सकती है?
क्या रोड के मध्य से बाई तरफ दक्षिण दिशा में 25 मीटर की जगह को महज 15 मीटर बता देना कोई मानवीय भूल है या किसी बिल्डर को फायदा पहुंचाने की सोची-समझी साजिश?
‘श्री बागेश्वर बालाजी एस्टेट’ को लाभ पहुंचाने की साजिश?

सूत्रों और दस्तावेजों से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि अधिकारियों का यह कथित ‘कन्फ्यूजन’ कोई गलती नहीं, बल्कि प्लॉटिंग करने वाले ‘श्री बागेश्वर बालाजी एस्टेट’ को सीधा लाभ पहुंचाने की एक सुनियोजित चाल है। शासकीय बेशकीमती जमीन को इस एस्टेट के निजी स्वामित्व में दिखाने और भू-माफियाओं की जेबें भरने के लिए यह पूरा जाल बुना गया।
जीवन भर की पूंजी लगाकर फंसी महिलाएं, खा रही हैं दर-दर की ठोकरें
अधिकारियों और माफियाओं के इस गठजोड़ का सबसे बड़ा खामियाजा उन भोले-भाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने अपना आशियाना बनाने के लिए जीवन भर की जमा पूंजी यहां लगा दी।
प्रभावित 10 से 12 महिलाये शामिल हैं। इन्होंने प्लॉट खरीदे थे, लेकिन अब माफिया जानबूझकर इन्हें परेशान कर रहे हैं।
पीड़ितों द्वारा सीमांकन (Demarcation) के लिए बकायदा आवेदन लगाया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से 45 मीटर का जिक्र है। इसके बावजूद, स्थानीय अधिकारी अभी भी अनजान बनने का नाटक कर रहे हैं और फाइलें दबाकर बैठे हैं।
कभी चला था बुलडोजर, अब मिल रहा है संरक्षण
सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला तथ्य यह है कि यह वही प्लॉटिंग की जमीन है, जिस पर कुछ साल पहले तत्कालीन एसडीएम (SDM) श्री विनय द्विवेदी जी ने अवैध निर्माण मानते हुए सख्त कार्रवाई की थी और बुलडोजर चलवा दिया था। जो जमीन कुछ साल पहले अवैध थी, आज उसी जमीन को वर्तमान अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के लिए ‘वैध’ बनाने के लिए सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।


कलेक्टर से शिकायत, न्यायालय और CM हेल्पलाइन की भी लेंगे शरण
इस खुली लूट और भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायतकर्ता ने मोर्चा खोल दिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा फिलहाल इस पूरे मामले की विस्तृत शिकायत जिला कलेक्टर और अन्य संबंधित उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई है।
दलालों और भ्रष्ट अधिकारियों की इस मिलीभगत से त्रस्त होकर अब शिकायतकर्ताओं ने न्याय के लिए उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाने और सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) की शरण लेने का भी मन बना लिया है, ताकि इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों को कठोर से कठोर दंड मिल सके।
अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन और प्रदेश के मुखिया का ‘एंटी-माफिया अभियान’ हरपालपुर के इन सफेदपोश माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों तक पहुंच पाता है, या फिर गरीबों की गाढ़ी कमाई यूं ही माफियाओं की भेंट चढ़ती रहेगी?

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