जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को मिला कड़ा समर्थन: हमीरपुर सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी पहुंचे मंच पर, पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठी जोरदार मांग

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नई दिल्ली:
देशभर में युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पनपे संकट के बीच, आज दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक जन-समर्थन देखने को मिला। विख्यात पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् श्री सोनम वांगचुक जी द्वारा देश के ज्वलंत मुद्दों पर की जा रही भूख हड़ताल को आज उस समय और मजबूती मिली, जब हमीरपुर (उत्तर प्रदेश) से समाजवादी पार्टी के सांसद श्री अजेंद्र सिंह लोधी जी स्वयं जंतर-मंतर मंच पर पहुंचे। उन्होंने सोनम वांगचुक जी के इस संघर्ष को अपना पूर्ण समर्थन दिया और देश के लाखों युवाओं के अधिकारों के लिए संसद से लेकर सड़क तक की लड़ाई का शंखनाद किया।
पेपर लीक: युवाओं के भविष्य के साथ गहरा खिलवाड़
हाल ही में सामने आए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं के ‘पेपर लीक’ मामलों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी और अन्य नेताओं की उपस्थिति में जंतर-मंतर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर अब और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस अवसर पर यह रेखांकित किया गया कि दिन-रात कड़ी मेहनत करने वाले लाखों छात्रों के सपनों को चंद भ्रष्टाचारियों के हाथों नीलाम नहीं होने दिया जा सकता। मौजूदा परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए एक ऐसी निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था के निर्माण की मांग की गई, जिस पर देश का युवा भरोसा कर सके।
प्रमुख मांगें:
मंच से सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें दृढ़ता के साथ रखी गईं:
दोषियों पर कठोर कार्रवाई: पेपर लीक सिंडिकेट में शामिल सभी बड़े और छोटे अपराधियों को चिन्हित कर उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
छात्रों के साथ न्याय: परीक्षा रद्द होने और लीक होने के कारण लाखों छात्रों के साथ हो रहे अन्याय और मानसिक प्रताड़ना को तुरंत समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
नैतिक जिम्मेदारी तय हो: व्यवस्था की इस बड़ी विफलता के लिए उच्च स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।
शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग
इस आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र बिंदु जवाबदेही तय करना रहा। समाजवादी पार्टी के सांसद अजेंद्र सिंह लोधी की उपस्थिति में मंच से स्पष्ट शब्दों में यह मांग उठाई गई कि इतनी बड़ी प्रशासनिक और ढांचागत विफलता के बाद, देश के शिक्षा मंत्री को तत्काल नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। यह तर्क दिया गया कि जब तक शीर्ष स्तर पर बैठे लोग जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
भविष्य की रूपरेखा: “आवाज़ निरंतर बुलंद रहेगी”
हमीरपुर के सपा सांसद के इस धरने में शामिल होने से आंदोलन को एक नई राजनीतिक धार मिली है। कार्यक्रम के अंत में युवाओं को आश्वस्त करते हुए यह संकल्प लिया गया कि यह लड़ाई केवल एक दिन की नहीं है।
युवाओं के अधिकारों, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों पर हमारी आवाज़ निरंतर बुलंद रहेगी। सोनम वांगचुक जी के शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली आंदोलन को मिले इस व्यापक समर्थन ने आज देश के युवाओं की इस पीड़ा को एक बड़ा राष्ट्रीय मंच दे दिया है।

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